May 11, 2011

बस एक लम्हा फिरसे जी ले !

एक आठ्वन चाळून घे ..........   हि कविता मला इमेल द्वारे मिळाली होती .बस त्याच कवितेचा हिन्दी अनुवाद करण्याचा हा प्रयत्न.


बस एक लम्हा फिरसे जी ले
नाव डूबनेसे पहले किनारा देख ले !
वो जो ले जाये तुझे नदियाँ पार
ऐसा सहारा ‌धुंद ले !!
समा जाऊंगा मै इसी सागरमे
आंखरीबार मुझे बाहोमे समा ले !!

रोना है जितना आज रों ले
तोडणी है जो कसमे तोड ले !
बस अब यांदे रह बची है मेरे पास
कुछ और चाहिये तो मांग ले !!

हर ख्वाब आज पुरा कर ले
आज आंखरी बार मुझे जी भरके देख ले !
कल तुझपर किसी और का हक होगा
यादे जो मिठाना है मीठा ले !!

नही मिलेंगे अलफाज फिरभी मिला ले
हर एक सफ़ॉ आज फिरसे पढ ले !
लम्हे तेरे जख्मोपे नमक छिडकते है
जाते जाते एक एक लम्हा फिरसे जी ले !!

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