September 6, 2013

मै सुरज हुं

लोग कहते है मै अच्छा लिखता ह्ँ !
उनकी नजरों में मै बन गया कवी हुं !
जलाकर खुदको थोडा थोडा ,
दुसरोंके के लिये  मै बन गया रवी हुं !

मै सुरज हुं जल रहा हुं
औरों के लिये !
दिन ढल रहा है
औरों के लिये !
श्याम  आती है सबकी थकान हरणे के लिये
मै रात में भी जलता हुं
श्याम नही आती मेरे लिये !

शायद सूरज में बहुत गरमी है
या श्याम में काम हो गयी नमी है !
पर श्याम नही आयेगी तो  निंद कैसे आयेगी
सुरज कि किरणे चांद को खुबसुरत कैसे बनायेगी !

मै सुरज हुं , मेरे पास मत आओ
दूर रहकर चांद बनकर गगन में छा जाओ !
दुनियाको  अपनी शितलतासे  , करुणासे  , सरलतासे
थके हरे जीवनको , नयी जिंदगी दे जाओ !
मेरी किरणे तुम्हे ओंर चमकायेंगी
ओंर तुम शितीज पर नजर आओगे !

मै जल रहा हुं , मुझे शीतल जर जाओं ,
मै सुरज हुं , जलना मेरा काम है  !
जलकर जीवन देना इसी में मेरा नाम है !
श्याम कि तरहा मेरा साथ निभाओं ,
मेरे गम मे  , मेरे कर्म में हाथ बथाओं !

पर  याद  रखना मेरे पास मत आना ,
बहुत गरमी है मुझमे , सच भूल न जाना  !
पास आकार तुम्हे , मेरे साथ जलना होगा ,
या तो बहुत शीतल या फिर मिटना होगा !

continue ............