आज मै चूप हु
क्या कल भी रहूंगा !
कब तक मला भला ये
दर्द सहूंगा !!
येकिन हैं मुझको यकीन है मुझको
दुनिया मे !
एक दिन
बुरा बनकर रहूंगा !!
उस दिन दुनिया से
अपनी खुशियां
वापस करने
को कहूंगा
लोग इंसान हैं
भगवान मैं भी नहीं हूं
आखिर कब तक भूल समझकर
माफ करता रहूंगा !!
इंसान हूं दिन तो
मरूंगा
कसम है मुझको
मेरे गमों की
आजसे ऊंची आवाज
न सुनूगा किसी
जिऊँगा तो शान से,
स्वाभिमान से
मरना ही है तो
शान से मरूंगा
घुट घुट कर कब तक
जीता रहूंगा !!
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